ग़ज़ल
जनता की जो करते खिदमतउनको मिलती रब की रहमत उनकोमिलसकती क्याउल्फ़तजिनके दिल में बसती नफरत रेपिस्टों से मत हों सहमतभेजें उन पर भर भर लानत अंदर तक रिपुदल घुस आयेअच्छी है क्या इतनी
Read Moreकभी अनदेखा नही करना अपनों सेदिल से दिल का रिश्ता बनाये रखनाबेगाने कभी काम नही आएंगे तुम्हारेअपनों पे हमेशा विश्वास
Read Moreऐसी रार मचाते आयेतहज़ीबें ठुकराते आये कहने भर के सारे रिश्तेएकतरफ़ा ही निभाते आये सबने छोड़ दिया जब हमकोख़ुद को
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