ग़ज़ल
दूर रह कर हमेशा हुए फासले, चाहें रिश्तें कितने क़रीबी क्यों ना होंकर लिए बहुत काम लेन देन के, विन
Read Moreशुरू हो गया आजकल, एक नया ही काम,खाली बैठे थक गये, कितना करें आराम? होती बातें प्यार की, जो हफ्ते
Read Moreआंखों में रहे अश्क़ जज़्बात ने रुकने न दियाबात थी मेरी ज़ुबाँ पर, लबों ने हिलने न दियाबस इक लम्हा
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