ग़ज़ल
आजादी के परवानों के सपनो से मत घात करोजिससे हो कमज़ोर वतन मत ऐसी कोई बात करो धर्मों के झंडाबरदारो
Read Moreघर का हर इक कोना सूना है तेरे बिना,कैसे कह दूँ जीना मुमकिन है तेरे बिना। खिलखिलाहट, हँसी, वो मासूम
Read Moreआपका बस मुझे आसरा चाहिए।यार दर मेरे खातिर खुला चाहिए।। कोई चाहे न चाहे मुझे ग़म नहीं।आप जैसी मगर दिलरुबा
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