ग़ज़ल
इस तरह से ज़िन्दग़ी में संतुलन कायम रखोकोशिशें ज़्यादा हमेशा और हसरत कम रखो पीठ पीछे मुस्कुराएगा ज़माना देख करमश्विरा
Read Moreजैसे भी हो नाम चाहिए।बस हमको आराम चाहिए।। बदनामी की नहीं है चिंता,हमको केवल दाम चाहिए। खेल स्वार्थ का खेल
Read Moreलोग भूल जाते हैं एहसान,जब खड़ा हो जाता है मकान। जिनके दर पे झुके थे हम कभी,आज वही लगते हैं
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