मक्खी मारने हथौड़ा न चलाएँ
मक्खी बैठी हो दीवारों पे, या भिनभिनाए कानों में,क्या हथौड़ा लेकर दौड़ेंगे, हम अपने ही मकानों में?रोकना तो राहों को
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Read Moreआसान नहीं नास्तिक होना,भीड़ से अलग राह पर चलना,अंधेरे में दीया बनकर जलना,न ईश्वर का खौफ,न अल्लाह का डर,न जिन्न
Read Moreचोर को अवसर दोगे,तो घर का सुकून लूट जाएगा,झूठ को जगह दोगे,तो विश्वास का दीप बुझ जाएगा,लालच को मन में
Read Moreमुरुद-जंजीरा की धरती पर, जब एक प्रभात खिला,एक जनवरी उन्नीस सौ इक्यावन, नया अध्याय मिला।दिनकर के संस्कार मिले, माँ की
Read Moreभारत देश हमारा त्योहारों का धाम है,ये खुशियों और आस्था का देता पैगाम है।होली में रंगो की बरसती फुहार है,दीवाली
Read Moreजिस आवाज़ में था सच का साहस,जिस आँखों में था “दर्द”, देता राहत।जिसके संवाद में जीवन बोलता था,आज वो ही
Read Moreहाथों में मोबाइल थामे,एक कोने में बैठे हैं,काम-धाम से नाता टूटा,बस रील्स में ही खो ऐंठे हैं,आज सुबह की धूप
Read Moreएक सच्ची मांहालातों से लड़नाउसने मन में ठानीपति की मौतजिम्मेदारियों का एहसासबच्चों के बचपन कोवह उजड़ने नहीं देना चाहती हैसास-ससुर
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