यादों की महफिल
विधा- कविताशीर्षक- यादों की महफिल वो सिमटी महकती-सी कुछ यादें,महका देतीं हैं तन-मन-जीवन,अक्सर पहुंचा देती हैं उन वीथियों में,जहाँ बीता
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- यादों की महफिल वो सिमटी महकती-सी कुछ यादें,महका देतीं हैं तन-मन-जीवन,अक्सर पहुंचा देती हैं उन वीथियों में,जहाँ बीता
Read Moreशेयर बाजार में कर रखा है बड़ा इन्वेस्टमेंटपोर्टफोलियो है डायवर्सिफाइड,बेटा पढ़ता है सातवीं कक्षा मेंडाॅक्टर बनाने के लिएकरवा दिया है
Read Moreएक बरस बीत गया तुम्हें गए,पर मैंने तुम्हें याद नहीं किया-क्योंकि मन की स्मृतियों मेंमैंने तुम्हें विदा… है नहीं किया।
Read Moreहरमन, तुमने क्यों छोड़ी कमान,आज यह पूछ रहा है हिंदुस्तान।जीत की राहों की ‘तुम: सरताज,तुमसे रोशन हुआ देश का मान।
Read Moreकी थी एक दिन नई शुरुआत,कुछ टूटे-फूटे शब्दों के साथ,भावों का समंदर उफन रहा था,मन कुछ लिखने को कह रहा
Read Moreउनका मशक्कत तो सिर्फ चुनावी समय में होता है,जो जीत गए हंसे पांच सालजनता तो रोने के लिए है इसलिएपूरे
Read Moreहाँ, वह चंदेलों की बेटी थी, गोंडों की बनी थी बहू,माटी की आन बचाने गई, रण की धधकती धू-धू।जन्म मिला
Read Moreतुम हर वक़्तसबके अंदर झांकते होढूंढते होकुछ बुराइयाँढेर सारी कमियाँयह अच्छी बात हैकभी अपने अंदर पल रहेकुछ ईर्ष्याकुछ खुरापातइनको भी
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